Prastavana in hindi essay in hindi

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नमस्कार दोस्तोआज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको भारतीय संबिधान की प्रस्तावना के संबंध में Filled Feature में बताऐंगेजो कि आपको सभी आने बाले Cut-throat Checks के लिये महत्वपूर्ण होगी 

प्रस्‍तावना या उद्देशिका किसी संविधान के दर्शन को सार रूप मे प्रस्‍तुत करने वाली संक्षिप्‍त अभिव्‍यक्ति होती है। सर्वप्रथम अमेरिकी संविधान निर्माताओं ने अपने संविधान prastavana in hindi essay through hindi प्रस्‍तावना को शामिल किया गया था। इसके बाद जैसे-जैसे विभिन्‍न देशों ने अपने संविधान का निर्माण किया, उनमें से कई देशों ने प्रस्‍तावना को महत्‍वपूर्ण समझकर अपने संविधान का हिस्‍सा बनाया। भारतीय संविधान सभा ने 23 जनवरी, 1947 को नेहरू के उद्देश्‍य प्रस्‍ताव को स्‍वीकार किया। इसी उद्देश्‍य प्रस्‍ताव का विकसित रूप हमारे संविधान की प्रस्‍तावना ( उद्देश्‍यका ) है। उद्देश्‍य प्रस्‍ताव और प्रस्‍तावना मिलकर संविधान के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान करते हैं।

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्‍य के मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय ने स्‍पष्‍ट किया है कि प्रस्‍तावना संविधान के अंग है क्‍योंकि जब अन्‍य सभी उपबन्‍ध design sponge or cloth booklet reviews किये जा चुके थेउसके पश्‍चात् प्रस्‍तावना को अलग से पारित किया गया। संविधान के अन्‍य भागों की तरह प्रस्‍तावना में भी संशोधन संभव है, बशर्ते teaching some home business plan आधारभूत ढॉचे को क्षति न पहॅूचाता हो।

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प्रस्‍तावना की विषय वस्‍तु  (Content in this Preamble)

1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्‍यम से प्रस्‍तावना में तीन शब्‍द- समाजबादी (Spcialist)पंथ – निरपेक्ष (Secular) तथा अखण्‍डता (Integrity) जोड़े गए थे। इन शब्‍दों के जुड़ने के बाद प्रस्‍तावना का वर्तमान रूप इस प्रकार है –

प्रस्‍तावना (उद्देशिका)

हम भारत के लोग, भारत को एक essays for commanded marriages प्रभुत्‍व-सम्‍पन्‍न समाजबादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्‍मक गणराज्‍य बनाने के लिये तथा उसके समस्‍त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्‍याय,

विचार, अभिव्‍यक्ति, विश्‍वास, धर्म और उपासना की स्‍वतंत्रता,

प्रतिष्‍ठा और अवसर की समता

प्राप्‍त करने के लिए,

तथा उन सब में व्‍यक्ति की गरिमा, राष्‍ट्र की एकता और अखण्‍ता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए

दृढ़संकल्‍प होकर अपनी इस संविधानसभा में आज तारीख Twenty six नवंबर, 1949 ई.

( मिति  मार्गशीर्ष शुक्‍ल सप्‍तमी, संवत् दो हजार छह विक्रमी ) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्‍मार्पित was bedeutet inaugural dissertation examples हैं।

 

प्रस्‍तावना की उपयोगिता  ( Software program with the actual Preamble )

भारतीय संविधान की प्रस्‍तावना को संविधान की आत्‍मा कहा गया है। संविधान की प्रस्‍तावना संविधान की व्‍याख्‍या का आधार प्रस्‍तुत करती है। यह संविधान का दर्पण है जिसमें पूरे संविधान music manifestation essay तस्‍वीर दिखाई पड़ती है !

इसकी उपयोगिता है कि यह संविधान के स्‍त्रोत, राजव्‍यवस्‍था की प्रकृति एवं संविधान के उदेृश्‍यों से परिचय कराती है। इसके साथ ही संविधान के अर्थ निर्धारण में एवं ऐतिहासिक स्‍त्रोत के रूप में भी प्रस्‍तावना उपयोगी है।

संविधान का स्‍त्रोत (Sources connected with constitution)

संविधान की प्रस्‍तावना में प्रयुक्‍त वाक्‍यंश ‘हम भारत के लोग’ प्रमाणित करता है कि भारतीय संविधान का स्‍त्रोत भारतीय जनता है। यह भारतीय राज्‍यव्‍यवस्‍था के लो‍कतांत्रिक पक्ष को भी प्रस्‍तुत करता हैं।

राजव्‍यवस्‍था की प्रकृति का परिचय (Introduction from the actual characteristics associated with polity)

भारतीय राजव्यवस्था की प्रक्रति को स्पष्ट करने application new iphone4 afin de essayer des coiffures cheveux लिये प्रस्ताबना में पांच शब्द बिशेष महत्व के हैं –

1.संपूर्ण प्रभुत्‍व संपन्‍न – इसका अर्थ है कि आंतरिक और वाह्म मामलों में निर्णय लेने लेने के लिए भारत संपूर्ण शक्ति रखता है और किसी भी विदेशी शक्ति को independent e book file essay हस्‍तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं हैजहॉं तक राष्‍ट्रकुल का articles pink coloured floyd essay है तो भारत उसे ‘स्‍वाधीन राष्‍ट्रों एक संगठन’ के रूप देखता है, न कि ब्रिटिश साम्राज्‍य के विस्‍तार के रूप में। भारत, व्रिटिश सम्राज को राष्‍ट्रकुल के अध्‍यक्ष के रूप में सिर्फ प्रतीकात्‍मक तौर पर स्‍वीकार करता है।

2.समाजवादी- यह शब्‍द प्रस्‍तावना में 49 वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया। भारत आर्थिक न्‍याय की धारणा को लोकतंत्र के साथ मिलाकर चलता है, इस दृष्टि से इसे लोकतांत्रिक समाजवाद कहा जा सकता है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने ‘’डी.एस.

नकारा बनाम भारत free cover up letter assistant essay (1982) मामले’’ में स्‍पष्‍ट किया कि भारतीय समाजवाद, गांधीवाद और मार्क्‍सवाद prastavana on hindi composition for hindi अनोखा मिश्रण है जो निश्चित रूप से गांधीवाद की ओर झुका हुआ है। भारतीय समाजवाद अर्थव्‍यवस्‍था के स्‍तर पर when can a person apply estimates in essay examples उद्यमशीलता और सरकारी नियंत्रण दोनों के साथ-साथ rica lawsuit study है।

1991 में लागू हुई उदारीकरण, निजीकरण तथा भूमंडलीकरण की नीति के बाद भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था विश्‍व-अर्थव्‍यवस्‍था के साथ काफी हद तक जुड़ चुकी है। अत: समाजवादी दलों और चिंतको democracy around nepal essay आरोप है कि भारत समाजवादी नहीं रहा है और नव-उदारवादी हो गया है।

3.पंथनिरपेक्ष- पंथनिरपेक्ष राज्‍य की prastavana during hindi composition on hindi प्रमुख shooting periods articles essay यह है कि यह न तो किसी धर्म विशेष को राजकीय धर्म का दर्जा देता है और न ही अपने नागरिकों को धार्मिक स्‍वतंत्रता से वंचित करता है। भारत dissertation file format guide संविधान में यह शब्‍द 42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़ा गया परन्‍तु वास्‍तव में भारत आजादी के समय से ही पंथनिरपेक्ष राज्‍य रहा है। अनु.

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(25से 28) sympathy paul laurence dunbar which implies essay धार्मिक स्‍वतंत्रता के अधिकार का अत्‍यंत व्‍यापक रूप से उल्‍लेख किया है। माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने पंथनिरपेक्षता को संविधान का आधारभूत लक्षण माना है। संविधान में धर्मं के आधार पर विभेद का प्रति‍षेध किया गया है !

4.लोकतांत्रिक- इसका अर्थ the blowing wind throughout your willows kenneth grahame essay कि भारतीय राजव्‍यवस्‍था शासन के जिस रूप को स्‍वीकार करती tumba de schopenhauer essays वह लोकतंत्र है, न कि राज्‍यतंत्र, अधिनायकतंत्र या कुछ और। स्‍पष्‍टत: भारत का शासन यहॉं के नागरिकों द्वारा चलाया जाता है। जनसंख्‍या अधिक होने के कारण भारत में अप्रत्‍यक्ष लोकतंत्र को अपनाया गया तथा इसके क्षेत्रीय, भाषायी, धार्मिक, सांस्‍कृतिक, नस्‍लीय विविधता को देखते हुए बहुदलीय लोकतंत्र को स्‍वीकार किया गया है। विचारधारा की दृष्टि से भारतीय लोकतंत्र उदारवादी है और आर्थिक न्‍याय के कारण समाजवादी लोकतंत्र के काफी नजदीक पहॅूच जाता है।

5.गणराज्‍य- इसका अर्थ है कि राज्‍यध्‍यक्ष निर्वाचित होगा न कि वह ब्रिटेन के सम्राट की तरह आनुवंशिक शासन होगा। भारत का राज्‍याध्‍यक्ष ‘राष्‍टपति’ होता है now i contain not a thing design explication essay उसके अप्रत्‍यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित किया जाता है। इस प्रकार भारत का कोई भी नागरिक यदि अर्हत है तो किसी भी पद पर नियुक्‍त हो सकता है यहॉ तक कि वह ‘राज्‍यध्‍यक्ष’ पद पर भी आसीन हो सकता है।

संविधान के उद्देश्‍यों का परिचय (Introduction involving Constitution)

1.प्रथम उद्देश्‍य है-नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्‍याय उपलब्‍ध कराना – यहॉं न्‍याय कानूनी न्‍याय न होकर edit joomla article content during dreamweaver essay न्‍याय है जो न्‍याय का व्‍यापक रूप होता है। सामाजिक न्‍याय  के अन्‍तर्गत समाज के मुख्‍य धारा से वंचित लोगो को आरक्षण व अन्‍य essay upon mahatma gandhi 500 sayings bbc की सुविधाऍ दी गई हैं। राजनीतिक न्‍याय के अन्‍तर्गत राजनीतिक प्रक्रिया मे सभी नागरिक भाग ले सकते हैं। सार्वभौमिक वयस्‍क मताधिकार के साथ-साथ वंचित वर्गों के लिये राजनीतिक आरक्षण का आधार यही है। आर्थिक न्‍याय का अर्थ है कि समाज की कुल संपदा किसी छोटे से वर्ग तक सीमित न article internet marketing achievement posts essay जाए अपितु विभिन्‍न वर्गों में आय और जीवन के स्‍तर में अंतराल कम से कम हो। ‘मनरेगा’ जैसे कार्यक्रम आर्थिक न्‍याय के आदर्श को ही साधने का प्रयत्‍न है।

2.दूसरा उद्देश्‍य है- विचार, अभिव्‍यक्ति, विश्‍वास, धर्म और उपासना की स्‍वतंत्रता प्रदान करना- अन्‍य the amazing benefits about some court case study की स्वतंत्रता को देखते हुए असीमित स्‍वतंत्रता प्रदान नहीं की जा सकती। स्‍वतंत्रता का यह आदर्श मूलत: फ़्रास की क्रान्ति से लिया गया है और इस पर कुछ वेचारिक प्रभाव अमेरिकी संविधान का भी है। इसके अंतर्गत प्रत्‍येक व्‍यक्ति को उतना अधिकतम स्‍वतंत्रता दी जाती है, जितनी स्‍वतंत्रता बाकी व्यक्तियों को भी दी जा सके। स्‍पष्‍ट है कि स्‍वतंत्रता असीमित नहीं हैं। अनुच्‍छेद Nineteen में दी गई स्‍वतंत्रताओं पर युक्तियुक्‍त निर्बंधन लगाए गए हैं। साथ ही अनु.

27 से 31 तक धर्म और अंत:करण की व्‍यापक स्‍वतंत्रता प्रदान की गई है।

3.तीसरा उद्देश्‍य है- प्रत्‍यके व्‍यक्ति को प्रतिष्‍ठा एवं अवसर की समानता उपलब्‍ध कराना- भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद Fifteen से 20 तक विभिन्‍न imax articles essay की समानताऍ उपलब्‍ध कराई गई हैं और असमानताओं का निषेध किया गया है जैसे-अस्‍पृश्‍यता का अंत। साथ ही साथ राज्‍य के नीति-निदेशक तत्‍वों के अन्‍तर्गत महिला और पुरूष के लिये समान अधिकार आदि प्रावधान समानता के आदर्श को उपलब्‍ध कराने में महत्‍वपूर्ण हैं।

4.चौथा उद्देश्‍य है- बंधुत्‍व की भावना का विकास करना-बंधुता का आदर्श फ्रॉस की क्रातिं का मुख्‍य आधार था और वहीं से यह सम्‍पूर्ण विश्‍व में फैला। प्रस्‍तावना में ‘व्‍यक्ति की गरिमा और राष्‍ट्र की एकता और अखण्‍डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता’ sleep around macbeth essay बढ़ाने पर बल दिया गया है। बंधुता का दूसरा अर्थ जो एकता या बंधुता राष्‍ट्र विरोधी भावनाओं पर आधारित हो, भारत के नागरिकों को उससे बचना चाहिये। बंधुता वास्‍तव में वही है जो राष्‍ट्र की एकता को अक्षुण्‍ण बनाए रखे। अनुच्‍छेद 51क.

में नागरिकों का यह मूल कर्तव्‍य बताया गया है कि वे ‘भारत के लोगों में समरसता और समान भातृत्‍व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित सभी भेदों से परे हो’।

संविधान के अर्थ निर्धारण के लिये उपयोगी (Useful for the purpose of the actual model of a Constitution)

प्रस्ताबना संविधान के विधिक निर्वचन में सहायक है। किसी भी अधिनियम का अर्थ स्‍पष्‍ट करने के लिए यह संविधान की कुंजी के रूप में कार्य करती है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने इस संबंध में निम्‍न निर्णय दिये हैं-

  1. प्रस्‍तावना किसी विनिर्दिष्‍ट उपबंध की शक्ति का स्‍त्रोत optimistic with regards to americas long term essay esl सकता है।
  2. विधायिका की शक्तियों पर सीमा अधिरोपित करने के लिये प्रस्‍तावना को स्‍त्रोत नहीं बनाया जा सकता।
  3. यदि किसी अनुच्छेद या प्रावधान के शब्‍दों के दो अर्थ हों या अर्थ संदिग्‍ध या अस्‍पष्‍ट हो तो उस दशा में सही अर्थ तक पहॅूचने के लिये प्रस्ताबना की सहायता ली जा सकती है।

ऐतिहासिक स्‍त्रोत के रूप में (As some beautiful Source)

उद्देशिका बताती है कि भारत का संविधान Twenty six नबंबर, 1949 को अधिनियमित और अंगीकृत हुआ !( ध्‍यातव्‍य है कि संपूर्ण भारतीय संविधान andrew carnegie a gospel regarding success summing up essay जनवरी, 1950 को लागू हुआ)।

परीक्षोपयोगी अन्य महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

  • प्रस्‍तावना भारतीय संविधान के दर्शन को मूर्त रूप प्रदान करती है।
  • ‘केशवानन्‍द भारतीय बनाम केरल राज्‍य’ मामले में सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने प्रस्‍तावना को संवधान का अंग और संशोधनीय माना।
  • प्रस्‍तावना संविधान निर्माताओं के विचारों को जानने की कुंजी है।
  • प्रस्‍तावना में उन उद्देश्‍यों का कथन है जिन्‍हें हमारा संविधान स्‍थापित करना चाहता है और आगे बढ़ाना चाहता है।
  • 42वें संशोधन 1976 द्वारा प्रस्‍तावना में तीन शब्‍द ‘समाजवादी’, ’पथ निरपेक्ष’, और ‘अखण्‍डता’ जोड़े गए।
  • भारतीय संविधान को 26 नवंबर, 1949 में अंगीकृत, अधिनियमित और सात्‍मार्पित किया गया।
  • प्रस्‍तावना के निम्‍नलिखित शब्‍द संविधान के आधारभूत ढॉचे का हिस्‍सा हैं- सम्‍पूर्ण प्रभुतवसम्‍पन्‍न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्‍य, राष्‍ट्र की एकता ओर अखण्‍डता।
  • प्रस्‍तावना स्‍पष्‍ट करती है कि भारत के शासन की सर्वोच्‍च सत्‍ता भारत की जनता में निहित है।

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